Saturday, 26 June 2021

रिशतों की गठरी

रिश्तों की गठरी

यह रिश्तों की तेरी गठरी में…..

कुछ रिश्ते तेरे जन्म के हैं

कुछ रिश्ते तेरे कर्म के हैं

कुछ रिश्ते तेरे धर्म के हैं

कुछ रिश्ते तेरे भर्म के हैं

कुछ रिश्ते तेरे खून के हैं

कुछ रिश्ते सिर्फ कानून के हैं

कुछ रिश्ते तेरे जनून के हैं

कुछ रिश्ते तेरे जिओंण के हैं

कुछ रिश्ते तेरे तन के हैं

कुछ रिश्ते तेरे मन के हैं

कुछ रिश्ते तेरे बचपन के

कुछ रिश्ते तेरी भटकन के

कुछ रिश्ते तेरी नादानी के

कुछ रिश्ते तेरी जवानी के

कुछ रिश्ते तेरे फर्जों के

कुछ रिशते तेरे कर्जों के

कुछ रिश्ते तेरी ग़लती के

कुछ रिश्ते तेरी हस्ती के

कुछ रिश्ते तेरी मस्ती के

कुछ रिश्ते तेरी दौलत के

कुछ रिश्ते तेरी शोहरत के

कुछ रिश्ते तेरी लिआकत के

कुछ रिश्ते तेरी नज़ाकत के

कुछ रिश्ते तेरी मुशक़्क़त के

कुछ रिश्ते तेरी मुहब्बत के

कुछ रिश्ते जोरा जोरी के

कुछ रिश्ते चोरी चोरी के

कुछ रिश्ते तेरी लाचारी के

कुछ रिश्ते जिम्मेदारी के

कुछ रिश्ते तेरे ऐबों के

कुछ रिश्ते तेरे खाबों के

कुछ रिश्ते तेरी ख़िदमत्त के

कुछ रिश्ते तेरी किस्मत के

कुछ रिश्ते तेरी मर्ज़ी के

कुछ रिश्ते ने ख़ुदग़र्ज़ी र्के  

कुछ रिश्तों हल्ला शेरी के

कुछ रिश्ते तेरी मेरी के

कुछ रिश्ते हेरा फेरी के

कुछ रिश्ते जी हज़ूरी के

कुछ रिश्ते ने मजबूरी के

कुछ रिश्ते अच्छे दूरी के 

कुछ रिश्ते साक सकीरी के

कुछ रिश्ते तेरी फ़क़ीरी के

कुछ रिश्ते लगते माँवां जेहे 

कुछ लगते बड़े भरावां जेहे

कुछ रिश्ते सद्धरां चावां जहे

कुछ ठन्ड़ीआं मिट्ठियाँ छावां जहे

कुछ रिश्तों ने एहसासां दे

ओह रहण जिओंदे आसां ते

कुछ रिश्ते सासां वरगे ने

ओह साथ नहीं साडा छड्डदे ने

कुछ रिश्ते बिना हिसाबां दे 

ओह मिलदे विच्च खुआबां दे

कुछ रिश्ते सिर्फ उलांभे दे

कुछ रिश्ते रहि गये सांभण दे

कुछ रिश्ते सोचीं पा गये ने

राहां दा रुख बदला गये ने

कुछ रिश्ते इक पल लई बन के

उमरां दी पूंजी बन गये ने

कई उमरां पाले रिशते सी

वो पहले तूफान ‘च ही खो गये ने

कुछ रिश्ते जिओण दा कारण ने

कुछ जीणा दूभर कर गये ने

कुछ रिश्ते दे गये ज़ख्म बड़े

कुछ ज़ख्मीं मरहम भर गए ने

कुछ रिश्ते सदा ही हरे रहे

कुछ मौसम बदलियां सुक्क गये

कई जुड़ के टुट्टियाँ जहे रहे

कई टुट्ण ते भी जुड़े रहे

इह रिशतियां दा जो भंवर जेहा

इक उलझन पैदा करदा है

कि किहड़े रिश्ते सच्चे ने

या किहड़े रिश्ते झूठे ने

या किन्ने गहरे पक्के ने

या किन्ने अक्के थक्के ने

पर इह वन्न सवन्ने उमरां दी

मिहनत नाल पाले रिशतियां दी

नकाब कदे तूं खोलीं न

जे खुल्ल गई तां खिललर जाऊ

फिर खिललरे रिशते फोलीं न 

जे फोलेंगा डर जाएंगा

ते नंग मलंगे रिशतियां विच्च

तू कल्ला ही रह जाएंगा

फिर तैनू फैसला करना पऊ

कि रिशते तैनू ज़रूरी ने

या रिशते ग़ैर ज़रूरी ने

जे रिशते तैनूं ज़रूरी ने

तां इहनां नकाबी रिशतियां दी

गठड़ी नू चक्क के चलदा रह

फिर गठड़ी विच्च पये रिशते

चाहे सच्चे ने या झूठे ने

चाहे कच्चे ने या पक्के ने

या किन्ने ई अक्के थक्के ने

जे रिशते तैनू ज़रूरी ने

फिर रिशते बड़े ज़रूरी ने

    ------ 0 ------

No comments:

Post a Comment